आओ विश करें : अच्छी मगर और अच्छी हो सकती थी ; रेटिंग : **1/2 ; कलाकार : आफताब शिवदासानी, आमना शरीफ तथा जॉनी लीवर; निर्देशक : ग्लेन बेरेटो.
फिल्म की कहानी 12 साल के छोटे मिक्की (आफताब) की है। उसका दिल टूट जाता है जब उसे पता चलता है कि वह एक अनाथ है और जिस लडकी की वह तमन्ना कर रहा था वह उसकी प्रेमिका नहीं बल्कि 23 वर्षीय फरिश्ता मितिका (आमन शरीफ)है, जो उसे बचपन से बच्चा पुकारती है। रास्ते के किनारे रहनेवाले जोकर हिचकॉक (जॉनी लीवर) के फुसलाने पर वह उस फरिश्ते से एक चमत्कार कहने को कहता है। उस वक्त तो कुछ नहीं होता मगर जब वह सवेरे सोकर उठता है तो देखता है कि वह एक बच्चे से एक युवा बन चुका है। उसके इस रूप को कोई नहीं पहचान पाता। यहां तक कि उसे अपने दोस्त बॉनी को इस बात के लिए मनाना पडता है कि वही उसका दोस्त मिकी है। वैसे अचानक बडे हो जाने से एक फायदा उसे यह होता है कि उसे मितिका के करीब आने का मौका मिल जाता है। वह उसे हर तरीके से प्रभावित करने की कोशिश करता है और उसे शादी के लिए राज़ी कर लेता है। शादी तो तय हो जाती है मगर उसके बाद कहानी में जो मोड आता है उसे देखने के लिए आपको सिनेमाघर जाना पडेगा।
‘आओ विश करें’ 1988 में बनी हॉलीवुड फिल्म ‘बिग’ से काफी हद तक प्रेरित है। इस फिल्म के ज़रिए निर्माता के साथ लेखक बनने में आफताब काफी हद तक सफल हुए हैं। फिल्म में आफताब द्वारा आमना को मनाते हुए दृश्य काफी आकर्षित करते हैं। साथ ही मिकी और हिचकॉक के बीच फिल्माए गए दृश्य भी काफी खूबसूरत हैं। मगर फिल्म की सबसे बडी खामी यह है कि जब आमना और आफताब की प्रेम कहानी शुरू होती है तब फिल्म दर्शकों पर अपनी पकड बनाने में नाकामयाब हो जाती है। आफताब ने अपनी क्षमता अनुसार खूबसूरत अभिनय शैली का प्रदर्शन किया है। इसमें दो राय नहीं है कि आमना जब भी स्क्रिन पर होती हैं तो खूबसूरत लगती हैं मगर पिछली फिल्म ‘आलू चाट’ की अपेक्षा इस बार उन्होंने अपनी अभिनय शैली का बढिया प्रदर्शन किया है। जहां तक जॉनी लीवर की बात है तो स्क्रिन पर उनका नज़र आना ही उनके दर्शकों के लिए राहत की बात होती है। साथ ही बॉनी के रूप में बच्चे ने काफी अच्छी भूमिका निभाई है।
सह निर्देशक के तौर पर ग्लेन बैरेटो, आफताब के साथ अपनी पिछली फिल्म ‘जाने होगा क्या’ में पहले ही काम कर चुके हैं। सो इस फिल्म में दोनों की एक दुसरे के प्रति सहजता को निहारा देखा जा सकता है। परियों की कहानी के साथ एक रोमांटिक फिल्म बनाने में ग्लेन काफी हद तक सफल हुए हैं। तीन संगीतकारों अंकुर तिवारी, ज़ुल्फी तथा मैक क्लेरी के साथ फिल्म के संगीत में काफी निखार आया है। यह और बात है कि अंकुर तिवारी के गीत ‘सबसे पीछे हम खडे’ इससे पहले ‘लेट्स इंजॉय’ में भी हम सुन चुके हैं। इसके साथ ‘स्लमडॉग मिलिनेयर’ फेम नृत्य निर्देशक लॉंजिन फर्नांडिस ने भी अपने काम के साथ पूरा न्याय किया है।
‘आओ विश करें’ एक खूबसूरत प्रेम कहानी पर आधारित फिल्म है मगर काल्पनिक लेखनी में कई खामियां होने के कारण दर्शकों को थोडा सा निराश कर सकते हैं। मगर फिर भी एक साफ सुथरी फिल्म को देखने की कल्पना करने वाले लोगों के लिए यह फिल्म उचित होगी।
-सम्पूर्ण मीडिया







